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तपस्या मोक्ष का मार्ग है : आचार्य लोकेश

आचार्य लोकेशजी का पर्युषण में विशेष प्रवचन

नई दिल्ली । प्रखर चिंतक व प्रख्यात जैन आचार्य डॉ लोकेशजी ने पर्युषण महापर्व पर आयोजित प्रवचनमाला को सम्बोधित करते हुए कहा कि आहार का आचार, विचार और व्यवहार से गहरा सम्बंध है।

आहार न केवल हमारे शरीर को बल्कि हमारे मन, बुद्धि, इन्द्रिय, भावना व आत्मा को प्रभावित करता है।इसलिए व्यक्ति को तामसिक व राजसिक आहार का सेवन नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा सात्विक भोजन शरीर की स्वस्थता के साथ साधना में भी सहायक बनता है। भगवान महावीर ने तपस्या को मुक्ति का मार्ग बताया है।

आचार्य लोकेशजी ने कहा कि उपवास का वास्तविक अर्थ है आत्मा के निकट निवास करना। निराहारता उसमें सहायक बनती है। तपस्या में मन व इन्द्रियाँ शांत रहताी है।

जिससे साधक ध्यान मौन स्वाध्याय आदि में सफल बनता है।जैन धर्म में भगवान महावीर ने 2600 साल पहले जीवन और अहिंसा के वास्तविक महत्त्व को बताया, हमारा विचार, व्यवहार, चरित्र, व्यक्तित्व और आत्मा का सीधा संबंध है कि हम क्या खाते हैं और क्या नहीं खाते हैं।

विश्व में सामुदायिक शांति व सौहार्द हेतु अहिंसा के जीवन और सिद्धांत के लिए श्रद्धा बुनियादी जरूरत है जिसका दूसरा कोई विकल्प नहीं है, आचार्य लोकेश ने प्रसिद्ध बर्नाड शॉ की उस उक्ति का उल्लेख किया जिसमे माँसाहारी के पेट को कब्रस्थान कहा जो मनुष्य के विचारो को प्रभावित करता है।

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